गैंगस्टर की गिरफ्तारी पर उठते 10 सवाल? जिन्हें आप भी जानना चाहते होंगे!

कानपुर के बिकरू गांव में 8 पुर्लिसकर्मियों का हत्यारा विकास दुबे उज्जैन के महाकाल मंदिर में घंटों तक बैठा रहा, घूमता रहा, पुजारियों को अपनी पहचान बताता रहा जब पुलिस पहुंची तो चिल्ला कर कहा “मैं विकास दुबे हूं कानपुर वाला”…गैंगस्टर विकास दुबे को आखिरकार उज्जैन के महाकाल मंदिर में पकड़ लिया गया। विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद नेक्स्ट इंडिया टाइम्स की टीम ने अपनी पड़ताल की है जिसमें 10 सवाल सामने आए हैं।

1- वारदात के बाद कानपुर से कैसे निकल गया?

कानपुर में 8 पुलिसकर्मियों को मारकर फरार होने वाले विकास दुबे से जुड़ा सबसे बड़ा सवाल है कि वारदात के बाद घर में खड़ी एक बाइक लेकर बिकरू गांव से कैसे भाग गया। इतनी बढ़ी वारदात को अंजाम देने के बाद यूपी पुलिस और एसटीएफ लगातार प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों और दूसरे राज्यों में विकास दुबे की तलाश में जुट गई लेकिन फिर भी विकास दुबे दो दिनों तक कानपुर के शिवली में ही दोस्त के घर ठहरा रहा, लेकिन यूपी एसटीएफ और 40 थानों की पुलिस हत्यारे का कोई भी सुराग नहीं लगा सकी।

2- कानपुर से औरैया कैसे पहुंच गया?

जब यूपी पुलिस हत्यारे की धरपकड़ के लिए जगह-जगह छापेमारी कर रही थी तब विकास दुबे किसी तरह 92 किलोमीटर की दूरी तय करके जनपद औरैया तक पहुंच गया। सख्त नाकेबंदी के बावजूद भी यूपी पुलिस उसका पीछा नहीं कर पाई।

3- औरेया से फरीदाबाद कैसे पहुंचा?

औरैया से फरीदाबाद की दूरी 385 किलोमीटर है। औरैया के बाद विकास दुबे हरियाणा के फरीदाबाद में पहुंचा। सवाल उठ रहा है कि इतनी लंबी दूरी के लिए किसने विकास दुबे को गाड़ी उपलब्ध कराई। सोमवार दोपहर 3:19 बजे हत्यारे विकास दुबे की आखिरी लोकेशन फरीदाबाद में मिली थी।

4- फरीदाबाद में होटल में रुका फिर पकड़ा क्यूं नहीं गया?

विकास दुबे को पकड़ने के लिए हरियाणा पुलिस और यूपी एसटीएफ की टीम फरीदाबाद के उस होटल में पहुंचती है जहां विकास रूका हुआ था लेकिन पुलिस के होटल में घुसने से पहले विकास दुबे वहां से रफ्फूचकर हो गया। एक सीसीटीवी में विकास दुबे एक झलक दिखाई दी है। बाद में वह फरीदाबाद में ही एक रिश्तेदार के घर में भी रूका रहा। यहां भी पुलिस के पहुंचने से पहले वह भाग गया।

5- फरीदाबाद से उज्जैन कैसे पहुंच गया?

विकास दुबे को सोमवार को फरीदाबाद में देखा गया था। इसके बाद वह कहां रहा, उसने क्या किया यह जांच का विषय है लेकिन आज सुबह उज्जैन में उसकी गिरफ्तारी हो जाती है। फरीदाबाद से उज्जैन पहुंचने के दो रास्ते हैं या तो विकास दुबे हरियाणा-यूपी के रास्ते मध्यप्रदेश पहुंचा होगा या फिर हरियाणा-राजस्थान के रास्ते उज्जैन पहुंचा होगा। बड़ा सवाल मध्य प्रदेश और राजस्थान की पुलिस भी चौकसी का दावा करती रहीं और विकास निकलता गया।

6- इतनी लंबी दूरी के लिए किसने उपलब्ध कराईं गाड़ियां?

वारदात के तीसरे दिन औरैया जिले में अज्ञात कार मिली थी। बताया गया कि विकास इसी कार से औरैया पहुंचा था। साथ ही एक गांड़ी उज्जैन में भी बरामद हुई है। औरैया से फरीदाबाद और फरीदाबाद से उज्जैन तक विकास दुबे को किसने गांड़िया उपलब्ध कराई। जिसके जरिए वह इतने राज्यों की सीमा पार करते हुए मध्यप्रदेश में दाखिल हुआ?

7. क्या ये सुनियोजित सरेंडर है?

विकास के सरेंडर के बाद पुुरजोर तरीके से सवाल उठ रहे हैं। तो क्या ये गिरफ्तारी नहीं सुनियोजित तरीके से किया गया सरेंडर है? इस सवाल को पंख इसलिए लग रहे हैं क्योंकि 8 पुलिसकर्मियों का हत्यारा विकास दुबे उज्जैन मंदिर में वीआईपी दर्शन की पर्ची कटवाकर महाकाल मंदिर में गया था। तो आंशका इस बात की बेहद ज्यादा है कि विकास दुबे को कई लोगों की मदद मिल रही थी।

8. ये दो वकील कौन हैं जिन्हें पुलिस ने हिरासत में है?
विकास दुबे के सरेंडर करने के बाद उज्जैन पुलिस ने दो वकीलों को भी हिरासत में लिया है। दोनों वकीलों फिलहाल पूछताछ चल रही है। दोनों वकील अपनी गाड़ी से उज्जैन गए थे।

9. पुलिस-नेताओं की कितनी मिलीभगत?

विकास दुबे के उज्जैन तक पहुंचने पर यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह ने सवाल उठाए हैं। विकम्र सिंह के अनुसार “विकास से पूछताछ की जाए तो बड़े-बड़े लोगों के नाम सामने आएंगे। इसमें आईएएस, आईपीएस, नेताओं के नाम सामने आ सकते हैं। विकास का उज्जैन में पकड़ा जाना समझ से बाहर है”।

10. विपक्ष का सीधा आरोप क्या दर्शाता है?

विकास दुबे की गिरफ्तारी के बाद गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का बयान सबसे पहले आया था। उन्होंने कहा, ‘हमने पूरी मध्यप्रदेश की पुलिस को अलर्ट पर रखा था। निगाह रखी जा रही थी। इंटेलिजेंस की बातें सीधी नहीं बताई जातीं। हम इसकी मर्म तक जाएंगे।’ गिरफ्तारी मंदिर से बाहर हुई या अंदर, इस सवाल पर उन्होंने कहा- बाहर हो, अंदर हो, मंदिर को बीच में न लाएं।

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह खुलकर कह दिया है कि- ‘यह तो उत्तरप्रदेश पुलिस के एनकाउंटर से बचने के लिए प्रायोजित सरेंडर लग रहा है। मेरी सूचना है कि मध्यप्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के सौजन्य से यह संभव हुआ है। शिवराज बिना किसी कारण के श्रेय ले रहे हैं। श्रेय तो गृह मंत्री जी को देना चाहिए। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा (मौजूदा गृह मंत्री) भाजपा के कानपुर जिले के प्रभारी थे।’

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सवाल उठाए हैं अखिलेश यादव ने योगी सरकार से विकास दुबे के मोबाइल की CDR सार्वजनिक करने की मांग है जिससे सच्चाई का भंडाफोड़ हो सके। कांग्रेस की महा प्रियंका गांधी ने यूपी सरकार से मामले की CBI जांच करा सभी तथ्यों और प्रोटेक्शन के ताल्लुकातों को जगज़ाहिर करने की मांग की है।

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