क्या दांतों की समस्या हृदय रोग का बन सकती है कारण? पढ़े पूरी रिपोर्ट

मुस्कुराने पर चमकते, सफेद दांत सबको अच्छे लगते हैं। ये आपकी पूरी पर्सनालिटी को खूबसूरत बनाते हैं। इसलिए फोटो खींचते समय दांत दिखाकर मुस्कुराने को कहा जाता है। हालांकि मुश्किल ये होती है कि लोग दांतों की सेहत को लेकर कम सचेत रहते हैं। दांतों के डॉक्टर के पास तब जाया जाता है जब दांतों में सड़न हो जाए, तेज दर्द हो या कोई गम्भीर चोट लग जाए। अन्यथा तो ज्यादातर लोग दो बार ब्रश करना भी जरूरी नहीं समझते। दांतों की सेहत में आपकी जीवनशैली की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। खराब जीवनशैली दांतों को गम्भीर नुकसान पहुंचा सकती है। ओरल हेल्थ का मतलब होता है दांतों सहित मसूडों, जुबान और गले तक की सेहत। इसका ख्याल रखकर आप एक साथ कई सारे स्वास्थ्य संबंधी फायदे पा सकते हैं। 

ज्यादातर लोग इस बारे में अनजान होते हैं कि उनके दांतों, मसूडों आदि को होने वाला नुकसान उनके पूरे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे दिल की सेहत को भी खतरा हो सकता है। जी हां, सुनने में अजीब लग सकता है लेकिन दांतों को होने वाला नुकसान कई तरह से हार्ट हेल्थ को खतरे में डाल सकता है। इसलिए जरूरी है कि ओरल हेल्थ को लेकर सतर्कता रखी जाए।

खराब ओरल हेल्थ के कारण हो सकती हैं कई दिक्कतें

मुंह की साफ-सफाई का पर्याप्त ध्यान न रखने से कई ऐसी स्थितियां पनपने लगती हैं जो दिल को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

इनके बारे में जानिए-
पेरियोडोंटाइटिस- मसूडों से जुड़ी इस समस्या को विशेषज्ञ हार्ट डिजीज की रिस्क से भी जोड़ते हैं। ये समस्या खासतौर पर दांतों पर जमने वाली चिपचिपी और बैक्टीरिया से भरी एक फ़िल्म (कोटिंग) की वजह से हो सकती है जिसे आम भाषा में प्लाक कहा जाता है। शोध यह मानते हैं कि गम डिजीज या मसूडों संबंधी समस्या, हार्ट डिजीज से जुड़ा हो सकता है। गम डिजीज से पीड़ित लोगों में हार्ट अटैक या स्ट्रोक की आशंका सामान्य लोगों की तुलना में दो-तीन गुना अधिक होती है। 
 
 अगर आप दांतों का ठीक से ख्याल नहीं रखते तो इसकी वजह से ब्लड स्ट्रीम यानी खून में एक बैक्टीरियल संक्रमण की स्थिति पैदा हो सकती है। इसका असर सीधे हार्ट के वॉल्व पर पड़ सकता है। 
 
दांतों के टूटने या उन्हें क्षति पहुंचने का पैटर्न कई लोगों में कोरोनरी आर्टरी डिजीज से भी जुड़ा हो सकता है। 
डायबिटिक लोगों में दांतों की खराबी का सीधा कनेक्शन कार्डियोवैस्क्युलर डिजीज से जुड़ा हो सकता है। डायबिटीज की स्थिति में दांतों का खास ख्याल रखना जरूरी हो जाता है। 

ओरल हेल्थ के लिए जरूरी बातें

ओरल हेल्थ को ठीक रखने के लिए इन बातों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
दिन में दो बार सही तरीके से ब्रश करें। यदि आप लंच में कुछ मीठा या गरिष्ठ खा रहे हैं तो उसके बाद भी ब्रश करें, यानी तीन बार। रात को बिना ब्रश किए सोने की आदत दांतों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाती है। इसलिए बचपन से ही सोने से पहले ब्रश करने की आदत डालें। 
 
एक वयस्क व्यक्ति को कम से डेढ़-दो मिनट और बच्चों को आधा-एक मिनट ब्रश को पूरे मुंह मे घुमाते हुए ब्रश करना चाहिए। खासकर कोनों में ब्रश को ऊपर-नीचे गोल घुमाते हुए चलाएं। इसके बाद अच्छी तरह से कुल्ला करके दांतों के बीच फंसे भोजन के कणों को निकालें। 
 
यदि आपको फ्लॉस करने की सही तकनीक आती हो तो इसे भी अपनाएं। लेकिन याद रखें फ्लॉस तेजी से या बहुत दबाव लगाते हुए न करें। 
 
 साल में दो बार अपना टूथब्रश जरूर बदले। न दूसरों का ब्रश उपयोग में लाएं न ही दूसरों को अपना ब्रश उपयोग में लाने दें। 
 
 यदि आप ब्रश की जगह नीम या बबूल की दातून को उपयोग में लाते हैं तो एक ही दातून को ज्यादा दिन प्रयोग में न लाएं। 
 
 ब्रश हमेशा सॉफ्ट ब्रिसिल्स वाली हों जिनसे मुंह की सफाई हो लेकिन मसूड़े छिलें नहीं।
 
 यदि आप माउथवॉश का प्रयोग करते हैं तो उसे भी हमेशा प्रयोग में लाने की बजाय कभी-कभी उपयोग में लाएं। माउथवॉश का अधिक उपयोग भी नुकसानदेह हो सकता है। 
 यदि दांत में दर्द या कोई भी तकलीफ हो तो तुरन्त डॉक्टर से सलाह लें। साल में कम से कम एक बार दांतों का चेकअप अवश्य करवाएं।

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