अगर कृषि क़ानून किसानों के हित में है, तो किसान संगठन इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?

न्यूज डेस्क/नेक्स्ट इंडिया टाइम्स: पिछले एक सप्ताह से भी अधिक समय हो गया है और देशभर में किसान केंद्र सरकार की मोदी सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। इस आंदोलन में पंजाब और हरियाणा के किसानों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया है। मोदी सरकार ने 5 जून, 2020 को एक जारी किया था, जिसे सितंबर महीने में संसद से पारित कराकर कानून बना दिया गया। जानते हैं कि इस अध्यादेश में क्या था?

अध्यादेश की मुख्य विशेषताएं
1. किसान उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन और सुविधा) अध्यादेश 2020 इस बात की अनुमति देता है की एपीएमसी बाजारों के भौतिक परिसर के बाहर कृषि उपज का व्यापार किया जा सकता है यह व्यापार राज्य के भीतर किया जा सकता है और राज्यों के बीच भी राज्य सरकारों को एपीएमसी क्षेत्रों के बाहर बाजार फीस, सेस या प्रभार वसूलने से प्रतिबंधित किया गया है।
 


 
2. किसान समझौता अध्यादेश किसी कृषि उत्पाद के उत्पादन या पालन से पहले किसान और खरीददार के बीच एक समझौते के जरिए कॉन्ट्रैक्ट खेती के लिए फ्रैम्वर्क बनाता है। यह तीन स्तरीय विवाद निपटान प्रणाली का प्रदान करता है कॉन्सिलिएशन बोर्ड, सब डिविजनल मजिस्ट्रेट और अपीली अथॉरिटी।
3. अनिवार्य अध्यादेश 2020 में केंद्र सरकार को यह अनुमति दी गई है कि वह सिर्फ असामान्य परिस्थितियों में (जैसे युद्ध और अकाल) कुछ खाद्य पदार्थों की सप्लाई को रेगुलेट कर सकती है। कृषि उत्पाद पर स्टॉक की सीमा तभी लागू हो सकती है। जब दाम बहुत अधिक बढ़ जाते हैं

  1. प्रमुख मुद्दे और विश्लेषण
    1. तीनों अध्यादेशों का उद्देश्य कृषि उत्पादों के लिए खरीददारों की उपलब्धता बढ़ाना है। इसके लिए लाइसेंस या स्टॉक लिमिट के बिना उन्हें मुक्त रूप से व्यापार की अनुमति दी गई है। जिससे प्रतिस्पर्धा बड़े और परिणाम स्वरूप किसानों को बेहतर कीमत मिल सके हालांकि अध्यादेशों का उद्देश व्यापार में उदारीकरण और खरीदारों की संख्या को बढ़ाना है। लेकिन सिर्फ रेगुलेशन खत्म करने से अधिक खरीददार आकर्षित नहीं होंगे।

2. कृषि संबंधी स्टैंडिंग कमिटी (2018-2019) ने कहा था कि किसानों को लाभकारी कीमतें मिले, यह सुनिश्चित करने के लिए पारदर्शी, आसानी से उपलब्ध होने वाला और कुशल मार्केटिंग प्लेटफार्म जरूरी है अधिकतर किसानों की पहुंच सरकारी खरीद केंद्रों और एपीएमसी बाजारों तक नहीं होती। कमेटी ने कहा था कि छोटे ग्रामीण बाजार कृषि मार्केटिंग के लिए व्यावहारिक विकल्प के तौर पर उभर सकते हैं, अगर उन्हें पर्याप्त संरचना गत सुविधाएं मुहैया कराई जाए।
3. स्टैंडिंग कमेटी ने यह भी सुझाव दिया था कि ग्रामीण कृषि मार्केटिंग योजना (जिसका उद्देश्य देशभर की 22,000 हाटों में इंफ्रास्ट्रक्चर और सिविल सुविधाओं में सुधार करना है) को पूरी तरह केंद्रीय वित्त पोषित योजना बनाया जाना चाहिए और उसे यह सुनिश्चित करने के लिए विस्तार दिया जाना चाहिए कि देश की हर पंचायत में हाट मौजूद हो।

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